ओबरा (सोनभद्र)।औद्योगिक नगरी ओबरा में संविदा श्रमिकों के शोषण और उत्पीड़न का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। वर्षों तक मेहनत करने के बाद भी मजदूरी न मिलने और फाइनल भुगतान को लेकर श्रमिकों का गुस्सा फूट पड़ा है। इस गंभीर समस्या को लेकर भारतीय संविदा श्रमिक संगठन के पदाधिकारियों ने उत्तर प्रदेश सरकार के माननीय समाज कल्याण मंत्री संजीव सिंह गौड़ से मुलाकात की और उन्हें एक विस्तृत शिकायती पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई। संगठन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषी संविदाकार कंपनियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे एक बड़े और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। भारतीय संविदा श्रमिक संगठन के पदाधिकारियों ने समाज कल्याण मंत्री को अवगत कराया कि ओबरा बीटीपीएस (BTPS) और सीटीपीएस (CTPS) क्षेत्र में सक्रिय कई संविदाकार कंपनियां श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन कर रही हैं। कंपनियों द्वारा स्थानीय और गरीब श्रमिकों का आर्थिक व मानसिक शोषण किया जा रहा है। वर्षों तक काम कराने के बाद भी उन्हें उनका कानूनी हक नहीं दिया जा रहा है।शिकायती पत्र में मुख्य रूप से दो बड़ी संविदाकार कंपनियों की मनमानी को उजागर किया गया है।आरोप है कि इस कंपनी ने श्रमिक राजकुमार यादव से तीन वर्षों से अधिक समय तक लगातार कार्य कराया। कार्य अवधि समाप्त होने या हटाने के बाद भी आज तक उनका फुल एंड फाइनल भुगतान नहीं किया गया। इसके अलावा, श्रमिक की एक महीने की पूरी मजदूरी भी कंपनी द्वारा अवैध रूप से रोक कर रखी गई है। इस कंपनी के साइट इंचार्ज सतेंद्र यादव पर बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। बताया गया है कि पीड़ित श्रमिक धनंजय श्रीवास्तव ने इस कंपनी में लगभग सात वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं। इसके बावजूद, साइट इंचार्ज ने बिना किसी फाइनल हिसाब-किताब के उन्हें नौकरी से बाहर निकाल दिया। श्रमिक का पिछले सात महीने का वेतन बकाया है और वह बीते एक साल से अपने भुगतान के लिए भटक रहा है, लेकिन प्रबंधन की ओर से कोई सुनवाई नहीं हो रही है। संगठन के मंत्री उमेश पटेल ने इस पूरे मामले में प्रशासनिक उदासीनता पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने बताया हमने इन मामलों को लेकर कई बार मुख्यमंत्री के IGRS पोर्टल और मुख्य महाप्रबंधक (CGM) कार्यालय में लिखित शिकायतें दर्ज कराईं। लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा, रसूखदार ठेकेदारों ने अधिकारियों के साथ साठगांठ कर झूठे साक्ष्य प्रस्तुत किए और शिकायतों का फर्जी निस्तारण करवा दिया। यही वजह है कि पीड़ित श्रमिकों को आज तक न्याय नहीं मिल सका। संगठन के अध्यक्ष मणि शंकर पाठक ने कड़े शब्दों में कहा कि श्रम नियमों के तहत श्रमिकों का जितने समय का भी शोषण किया गया है, उसका पाई-पाई का हिसाब होना चाहिए। कंपनियों को तत्काल प्रभाव से पूरा बकाया वेतन और फाइनल सेटलमेंट करना होगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, श्रमिकों को समय
भुगतान नहीं तो होगा उग्र आंदोलन पर मजदूरी मिलना उनका संवैधानिक अधिकार है, जिससे उनके परिवार का भरण-पोषण होता है। अगर शासन-प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया और शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो संगठन सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। समाज कल्याण मंत्री को पत्र सौंपने के दौरान संगठन की एकजुटता दिखाई दी। इस मौके पर संगठन के उपाध्यक्ष रणजीत तिवारी, महामंत्री कृष्ण कुमार पाठक, कोषाध्यक्ष नवलेश वर्मा, संयुक्त मंत्री रामेश्वर गिरी, महेंद्र पांडे के साथ-साथ पीड़ित श्रमिक धनंजय श्रीवास्तव, राजकुमार यादव और भारी संख्या में अन्य संविदा कर्मचारी उपस्थित रहे।
ओबरा में श्रमिकों के शोषण पर फूटा गुस्सा समाज कल्याण मंत्री को सौंपा शिकायती पत्र, उग्र आंदोलन की चेतावनी
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