सोनभद्र। सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी (DM) चर्चित गौड़ ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। हाल ही में आयोजित जनसुनवाई के दौरान प्राप्त शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसमस्याओं के निस्तारण में किसी भी प्रकार की शिथिलता या भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनसुनवाई के दौरान ग्राम कुसाही (केकराही) के निवासी शिव कुमार ने एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित का आरोप था कि गांव में चल रही चकबंदी प्रक्रिया के दौरान, उनके चक को सही स्थान पर आवंटित करने के एवज में ग्राम प्रधान और चकबंदी लेखपाल रोहित तिवारी द्वारा अवैध रूप से धन (रिश्वत) की मांग की जा रही है। जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बन्दोबस्त अधिकारी चकबंदी को तत्काल जांच के आदेश दिए। डीएम के कड़े रुख के बाद, लेखपाल रोहित तिवारी को तत्काल प्रभाव से उनके वर्तमान पद से हटाकर सहायक चकबंदी अधिकारी, राबर्ट्सगंज द्वितीय कार्यालय से सम्बद्ध (Attach) कर दिया गया है।भ्रष्टाचार के खिलाफ दूसरी बड़ी कार्रवाई ब्लॉक मिशन प्रबंधक (BMM) प्रदीप कुमार जायसवाल के विरुद्ध हुई। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल के माध्यम से शिकायत की थी कि बीएमएम, बुक कीपर पूजा के साथ मिलकर वित्तीय गड़बड़ियों और अनियमितताओं में संलिप्त हैं।जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला विकास अधिकारी (DDO) और खंड विकास अधिकारी (BDO) ने संयुक्त जांच की। जांच में प्रदीप कुमार जायसवाल की कार्यप्रणाली संदिग्ध पाई गई और यह सिद्ध हुआ कि वे अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन ईमानदारी से नहीं कर रहे थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर उपायुक्त स्वतः रोजगार ने उन्हें तत्काल प्रभाव से जिला मिशन प्रबंधन इकाई से सम्बद्ध कर दिया है। जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने जिले के समस्त अधिकारियों को कड़े लहजे में निर्देशित किया है कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों पर न होकर धरातल पर होना चाहिए आईजीआरएस और जनसुनवाई के मामलों में देरी अक्षम्य होगी। यदि किसी भी विभाग में भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कठोर कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे।प्रशासन का मुख्य उद्देश्य अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की समस्या का समाधान करना है। यदि कोई कर्मचारी इसमें बाधा बनता है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। चर्चित गौड़, जिलाधिकारी
जनसुनवाई में जिलाधिकारी का चाबुक भ्रष्टाचार और लापरवाही पर कड़ा प्रहार
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