सोनभद्र (ओबरा)। दीया तले अंधेरा वाली कहावत उत्तर प्रदेश की ऊर्जा नगरी कहे जाने वाले ओबरा (सोनभद्र) पर इन दिनों बिल्कुल सटीक बैठ रही है। जिस ओबरा के पावर प्लांट से पैदा होने वाली बिजली से पूरा प्रदेश रोशन होता है, आज उसी ओबरा की जनता बूंद-बूंद बिजली के लिए तरस रही है। चढ़ती दोपहर और भीषण गर्मी के बीच हो रही अघोषित और अंधाधुंध बिजली कटौती ने स्थानीय नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है। विभाग के इस अड़ियल और लापरवाह रवैये से उपभोक्ताओं में भारी रोष व्याप्त है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बिजली कटने का कोई तय समय नहीं है। विभाग की जब मर्जी होती है, तब ट्रिपिंग या फॉल्ट के नाम पर सप्लाई बंद कर दी जाती है। सुबह हो या दोपहर, जब सूरज आग उगल रहा होता है और लोगों को बिजली की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, ठीक उसी वक्त बिजली गायब कर दी जाती है। उमस और चढ़ती धूप के बीच घंटों बिजली न रहने से बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग गर्मी से बेहाल हो रहे हैं। बिजली कटौती से परेशान उपभोक्ताओं ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है।हम समय पर बिजली का बिल देते हैं, कोई चोरी नहीं करते। जब विभाग हमसे वसूली में कोई ढिलाई नहीं बरतता, तो फिर हमें 24 घंटे निर्बाध बिजली क्यों नहीं दी जा रही? इस भीषण गर्मी में हमारी गाढ़ी कमाई के बदले हमें सिर्फ तड़पने के लिए छोड़ दिया गया है। बिजली न रहने से न सिर्फ घरों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शोपीस बन गए हैं, बल्कि पानी की सप्लाई भी पूरी तरह प्रभावित हो रही है, जिससे लोगों के सामने दोहरी समस्या खड़ी हो गई है। क्षेत्र की जनता में इस बात को लेकर गहरी निराशा और आक्रोश है कि प्रशासनिक स्तर पर उनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। लोगों का साफ तौर पर कहना है कि ओबरा में कोई भी नया एसडीओ (SDO) या अधिशासी अभियंता आए, लेकिन यहां की बिजली व्यवस्था का ढर्रा कभी नहीं बदलता। हर बार नए अधिकारियों के आने पर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति जस की तस हो जाती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, जर्जर तार, ओवरलोडेड ट्रांसफार्मर और मेंटेनेंस के नाम पर खानापूर्ति ही इस कटौती की मुख्य वजह है, जिसे ठीक करने में विभाग नाकाम रहा है। इस अघोषित बिजली कटौती का सीधा असर अब ओबरा के स्थानीय व्यापार पर भी पड़ने लगा है। दुकानदारों, छोटे उद्योगों और ऑनलाइन काम करने वाले युवाओं का धंधा चौपट होने की कगार पर है। लगातार हो रही इस प्रताड़ना से तंग आकर अब क्षेत्रीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि बिजली विभाग ने अपनी मनमानी बंद नहीं की और चढ़ती दोपहर में की जाने वाली अघोषित कटौती पर तुरंत रोक नहीं लगाई, तो वे बिजली दफ्तर का घेराव करने और सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
जहां पैदा होती है बिजली, वहीं पसरा है अंधेरा ओबरा में अघोषित बिजली कटौती से त्रस्त जनता, दावों की खुली पोल
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