(गाजीपुर)नगर की गलियों, सड़कों और चौक-चौराहों पर “या हुसैन” और “सलाम इब्ने हैदर पे लाखों सलाम” की सदाएं गूंजती रहीं। हर ओर गम का माहौल था, आंखों में आंसू थे और दिलों में कर्बला के शहीदों की याद ताजा हो रही थी।
ग्राम सभा फतेहपुर अटवा क्षेत्रों से हजरत इमाम हसन और हजरत इमाम हुसैन की याद में ताजिया जुलूस बड़े ही अदब, एहतराम और अकीदत के साथ निकाले गए। ताजियों की खूबसूरती, सजावट और उनकी भव्यता लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही।
ग्राम सभा फतेहपुर अटवा के चौराहे पर देखने को मिला जब अटवा और फतेहपुर के ताजिये एक साथ उठे और पारंपरिक लाठी मिलनी का कार्यक्रम संपन्न हुआ। हजारों की संख्या में मौजूद लोगों ने इस दृश्य को देखा और “या हुसैन” की सदाओं से पूरा इलाका गूंज उठा। अकीदतमंदों की भीड़ में हर कोई कर्बला के शहीदों को याद करता नजर आया।
जुलूस के दौरान विभिन्न मातमी अंजुमनों ने नौहाखानी और मर्सियाखानी प्रस्तुत कर कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत को याद किया। अंजुमनों की दर्दभरी आवाजें सुनकर कई लोगों की आंखें नम हो गईं। “हाय हुसैन” की सदाओं के बीच मातम का सिलसिला लगातार जारी रहा।
क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर पारंपरिक लकड़ी का खेल, बनेटी तथा अन्य करतबों का प्रदर्शन भी किया गया। युवाओं और कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन कर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं मातमी अकीदतमंदों द्वारा जंजीर का मातम तथा आग पर चलकर मातम करने के दृश्य अत्यंत भावुक कर देने वाले रहे। मातम के दौरान उपस्थित लोगों की आंखों से आंसू बह निकले और पूरा वातावरण गमगीन हो उठा।
देर रात तक ताजिया जुलूस अपने-अपने निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला की ओर रवाना हुए। रास्ते भर विभिन्न समुदायों के लोग ताजियों और अकीदतमंदों का सम्मान करते दिखाई दिए। जगह-जगह लोगों द्वारा पानी, शर्बत और अन्य सेवाओं की व्यवस्था की गई, जिससे आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल देखने को मिली।
कर्बला पहुंचने के बाद नौहा, सलाम, मातम और फातिहा का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। अकीदतमंदों ने अश्कबार आंखों से इमामे हुसैन की शहादत को याद करते हुए उन्हें खिराजे अकीदत पेश की। कर्बला का दृश्य अत्यंत मार्मिक था। हर ओर गम, मातम और इमामे हुसैन की याद में डूबे अकीदतमंद नजर आ रहे थे।
मोहर्रम के इस मातमी जुलूस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी लगातार भ्रमण कर हालात पर नजर बनाए हुए थे।
संवेदनशील स्थानों पर चौकी प्रभारी अविनाश तिवारी पुलिस बल तैनात रहे और पूरे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया।
माहे मोहर्रम का यह मातमी जुलूस एक बार फिर कर्बला के शहीदों की कुर्बानी, सब्र, इंसाफ, सच्चाई और इंसानियत के पैगाम को जीवंत करता नजर आया। देर रात तक नगर में नौहाखानी और मातमी कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहा तथा अकीदतमंदों ने नम आंखों से इमामे हुसैन को खिराजे अकीदत पेश किया।

