सोनभद्र (ओबरा)। ओबरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत बिल्ली चढ़ाई पर शनिवार सुबह रफ्तार के अंधाधुंध खेल ने न सिर्फ एक और हंसते-खेलते परिवार का चिराग बुझा दिया, बल्कि इंसानियत को भी शर्मसार कर दिया। सुबह लगभग 8:39 बजे खदान से बोल्डर लादकर काल बनकर दौड़ रहे एक अनियंत्रित टिपर ने बिल्ली चढ़ाई के खतरनाक मोड़ पर एक मोटरसाइकिल सवार युवक को बेरहमी से कुचल दिया। हादसे के बाद जो हुआ, उसने प्रत्यक्षदर्शियों का दिल दहला दिया। यह महज एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि चालक की घोर संवेदनहीनता और क्रूरता का जीता-जागता उदाहरण बन गया। चश्मदीदों के अनुसार, टक्कर इतनी भीषण थी कि मोटरसाइकिल सीधे टिपर के नीचे फंस गई। दुर्घटना के बाद जब गंभीर रूप से घायल युवक दर्द से चिल्लाया और चीख पुकार मची, तो टिपर ड्राइवर ने कुछ पल के लिए वाहन को रोका। लेकिन तड़पते हुए घायल की जान बचाने या उसे अस्पताल पहुंचाने के बजाय, ड्राइवर ने नीचे उतरकर टिपर में फंसी मोटरसाइकिल और युवक को बाहर खींचकर निकाला। इसके बाद वह गंभीर रूप से घायल युवक को तड़पता हुआ सड़क पर ही छोड़कर अत्यंत तेज गति से वाहन समेत मौके से फरार हो गया। समय पर इलाज न मिलने और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण युवक ने मौके पर ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। इस रूह कंपा देने वाले हादसे के बाद मौके पर स्थानीय राहगीरों की भारी भीड़ जुट गई। सूचना मिलते ही ओबरा थाना पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस ने क्षत-विक्षत हो चुके शव को अपने कब्जे में लिया। मृतक की पहचान अंकित चौरसिया (उम्र लगभग 26 वर्ष), पुत्र नन्दलाल चौरसिया, निवासी सेक्टर नम्बर-8 के रूप में की गई है। जैसे ही इसकी खबर अंकित के घर पहुंची, परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है और फरार क्रूर टिपर चालक व वाहन की तलाश के लिए जाल बिछा दिया है। बिल्ली चढ़ाई का यह पूरा मार्ग अब स्थानीय लोगों के लिए ब्लैक स्पॉट नहीं बल्कि डेथ जोन बन चुका है। कुछ ही दिन पहले भी इसी तरह एक बेकाबू टिपर ने एक अन्य बाइक सवार को अपनी चपेट में ले लिया था, जिससे उसकी जान चली गई थी। लगातार हो रही इन मौतों के बाद भी स्थानीय प्रशासन और परिवहन विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है। क्षेत्रीय जनता का गुस्सा इस बात पर फूटा है कि आखिर ये भारी वाहन आबादी वाले मोड़ों पर भी अपनी रफ्तार कम क्यों नहीं करते।ग्रामीणों और शहर के लोगों का सीधा और गंभीर आरोप है कि क्रेशर और खदान मालिकों द्वारा टिपर चालकों को ज्यादा से ज्यादा चक्कर (ट्रिप) लगाने के लिए बख्शीश (अतिरिक्त प्रलोभन राशि) दी जाती है। इस लालच के चक्कर में ड्राइवर सड़कों पर गाड़ियां दौड़ाते नहीं, बल्कि उड़ाते हैं। खदानों से निकलने वाले वाहनों में क्षमता से अधिक बोल्डर लादे जाते हैं। इन वाहनों के ऊपर कोई तिरपाल या सुरक्षा घेरा नहीं होता, जिससे सड़कों पर पत्थर गिरते रहते हैं। पीछे चल रहे दोपहिया वाहन चालक अक्सर इन पत्थरों से टकराकर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। बिल्ली चढ़ाई के मुख्य मोड़ और शारदा मंदिर के पास जहां सबसे ज्यादा खतरा है, वहां गति सीमा तय करने के लिए एक भी स्पीड ब्रेकर (गति अवरोधक) नहीं बनाया गया है। शारदा मंदिर से लेकर बघा नाला तक की सड़क लोक निर्माण विभाग (PWD) के दस्तावेजों में 30 फीट चौड़ी दर्ज है, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। विभाग की घोर लापरवाही के कारण सड़क के दोनों किनारों पर कई-कई फीट तक गिट्टी, बोल्डर और भस्सी (क्रेशर की डस्ट) का अंबार लगा हुआ है। इस अतिक्रमण और मलबे के कारण सड़क की वास्तविक चौड़ाई आधी रह गई है, जिससे वाहनों को मुड़ने की जगह नहीं मिलती।
ग्रामीणों और शहर के लोगों का कहना है कि इस मार्ग से जब भी कोई भारी वाहन गुजरता है, तो आसमान में धूल का ऐसा गुबार छा जाता है कि पीछे आ रहे मोटरसाइकिल और कार चालकों को सामने का रास्ता देखना बंद हो जाता है। सामने जीरो विजिबिलिटी (शून्य दृश्यता) होने के कारण लोग सड़क पर बिखरे पत्थरों या सामने से आ रहे वाहनों को नहीं देख पाते और सीधे हादसे का शिकार हो जाते हैं। नियमत सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव होना चाहिए, लेकिन धूल दबाने का यह सरकारी नियम सिर्फ कागजों में ही दफन है। इस दर्दनाक हादसे और चालक की क्रूरता ने बिल्ली चढ़ाई और ओबरा के क्षेत्रीय नागरिकों के सब्र का बांध पूरी तरह तोड़ दिया है। आक्रोशित जनता ने जिला प्रशासन, पुलिस और परिवहन विभाग (RTO) से बेहद कड़े शब्दों में मांग की है कि आरोपी टिपर चालक को तत्काल गिरफ्तार कर उसके खिलाफ साधारण दुर्घटना के बजाय गैर-इरादतन हत्या या हत्या की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए। इस मार्ग पर ओवरलोड और अनियंत्रित गति से भागने वाले टिपरों के खिलाफ तत्काल सघन चेकिंग अभियान चलाकर गाड़ियों को सीज किया जाए। बख्शीश और ओवरलोडिंग के इस जानलेवा खेल को रोकने के लिए दोषी क्रेशर और खदान मालिकों को सह-आरोपी बनाया जाए। PWD विभाग तुरंत सड़क के दोनों तरफ से मलबे को हटाए, संवेदनशील मोड़ों पर स्पीड ब्रेकर बनाए और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस मार्ग पर रोजाना पानी का छिड़काव सुनिश्चित करवाए। स्थानीय निवासियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि शासन और प्रशासन ने इन बेलगाम दौड़ते टिपरों पर अंकुश नहीं लगाया और सड़क की स्थिति नहीं सुधारी, तो क्षेत्र की जनता चक्का जाम कर उग्र आंदोलन करने को विवश होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
सोनभद्र ओबरा में क्रूरता की हदें पार बिल्ली चढ़ाई पर युवक को रौंदने के बाद तड़पता छोड़ भागा टिपर चालक, मौके पर ही दर्दनाक मौत
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