सोनभद्र।माननीय राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार तथा माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सोनभद्र के आदेशानुसार पूरे देश में 01 जनवरी 2026 से राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत सोनभद्र जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मध्यस्थता केंद्र को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है, जहां आपसी विवादों के कारण टूटने की कगार पर पहुंचा एक परिवार मध्यस्थता के जरिए पुनः एक हो गया। वर्ष 2026 में प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय सोनभद्र के समक्ष अमन कुमार बनाम मन्तशा का मुकदमा पंजीकृत हुआ था। यह मुकदमा हिंदू विवाह अधिनियम की धारा-9 (वैवाहिक अधिकारों की पुनर्स्थापना) के तहत दर्ज किया गया था। दोनों पक्षों के बीच उपजे आपसी मतभेदों और कड़वाहट के कारण मामला अदालत की चौखट तक पहुंच गया था। गंभीरता को देखते हुए परिवार न्यायालय ने इस पत्रावली (फाइल) को सौहार्दपूर्ण सुलह-समझौते और वार्ता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के ए.डी.आर. (ADR) भवन स्थित मध्यस्थता केंद्र में प्रेषित कर दिया। मामला विधिक सेवा प्राधिकरण में आने के बाद राहुल, सिविल जज (सीनियर डिवीजन)/पूर्णकालिक सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सोनभद्र ने त्वरित संज्ञान लिया। उन्होंने इस पत्रावली में मध्यस्थता की कार्यवाही के लिए वरिष्ठ एवं अनुभवी मध्यस्थ अधिवक्ता अनिल कुमार सिंह को नियुक्त किया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और मध्यस्थ अधिवक्ता ने मामले को सुलझाने के लिए बेहद संवेदनशील और त्वरित प्रक्रिया अपनाई। मध्यस्थ अधिवक्ता ने दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर बेहद शांत और आत्मीय माहौल में काउंसलिंग की। दोनों पक्षों की बातों को धैर्यपूर्वक सुना गया और उनके बीच की गलतफहमियों व आपसी मतभेदों को कानूनी पेचीदगियों से दूर हटकर सामाजिक और पारिवारिक दृष्टिकोण से दूर कराया गया।मध्यस्थता केंद्र की सकारात्मक काउंसिलिंग का असर यह हुआ कि दंपत्ति (अमन और मन्तशा) के दिलों में जमी बर्फ पिघल गई। दोनों पक्षों ने बिना किसी बाहरी दबाव के, राजी-खुशी एक-दूसरे के साथ स्वेच्छा से पुनः वैवाहिक जीवन की नई शुरुआत करने का फैसला कर लिया। इस सुखद निस्तारण से न केवल कोर्ट-कचहरी के चक्करों से दोनों पक्षों को मुक्ति मिली, बल्कि एक हंसता-खेलता परिवार बिखरने से बच गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राहुल ने आम जनमानस से अपील की है कि वे इस राष्ट्रीय अभियान का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। पारिवारिक, दीवानी या अन्य शमनीय (सुलह योग्य) विवादों में उलझे लोग संबंधित न्यायालय में एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर अपने मामले को चिन्हित करवा सकते हैं। इसके बाद मध्यस्थता के माध्यम से बिना किसी खर्च और मानसिक तनाव के, बेहद गोपनीय और सौहार्दपूर्ण माहौल में अपने मामलों का त्वरित निस्तारण करवा सकते हैं।
सोनभद्र में राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान लाया खुशहाली बिखरने की कगार पर पहुंचा परिवार फिर बसा, राजी-खुशी साथ रहने को तैयार हुआ दंपत्ति
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