रसडा़ (बलिया)। क्षेत्र के कवि साहित्यकारों ने रविवार को मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन आरंभ किया। इस आयोजन का उद्देश्य यह है कि क्षेत्र के युवा लेखक कवि को अपनी लेखनी निखारने का अवसर मिलेगा। उन्हें अपने प्रतिभा दिखाने का स्थान मिलेगा यह मासिक काव्य गोष्ठी महीने के प्रत्येक अंतिम रविवार को होती रहेगी। कवि साहित्यकार नरेंद्र कुमार अनुराग के आवास पर हुई काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता बलिया से पधारे फतेहचंद बेचैन ने किया। शायर अकबर ज्या ने मां की ममता का चित्रण करते हुए सुनाया ‘एक पल जो दूर होऊ वो तड़प जाती थी, मेरे दिल के टुकड़े कहकर सीने से लगाती थी। संचालक अनुराग ने पी.एन तिवारी को आवाज दिया और उन्हो ने ‘वो दिन कितने अच्छे थे,,जब हम दोनो संग रहते थे। सुनाया जिसे सराहा गया। इसी कड़ी मे मुखराम यादव नेमी ने ‘ हम तो हैं पुजारी अपने हिंदुस्तान के भारत संविधान के।देश भक्ति गीत सुनाई। फिर शौकत वाजदी ने खड़ा होते ही कहा’ वह जरूर किसी मासूम का कातिल होगा, जिसे हंसते हुए हमने कम देखा है। क्षेत्र के मशहूर व्यंग रचनाकार सुनील कुमार सरदासपुरी ने सामाजिक पीड़ा पर अपनी रचना पेश करते हुए सुनाया कि’ देखा दुनिया को तो दुनिया हमें खूब भायी, देख भाई ने भाई की खून बहाई ,देखा बहाई खून भाई भाई की खातिर तो बड़ा आश्चर्य हुआ, यहां तो कुछ भले हैं कुछ है कसाई। सुनाकर सामाजिक दुर्व्यवस्था पर कड़ा प्रहार किया संचालन कर रहे अनुराग ने बहुत से लोग अपने ही दुखों के गीत गाते हैं होली हो या दिवाली सदा मातम मनाते हैं, सुनाकर अध्यक्षता कर रहे बेचैन जी को आवाज़ लगाई और उन्होंने राष्ट्रभक्ति की कविता सुनाते हुए गोष्ठी का समापन किया और अंत में कवियों ने मासिक कवि गोष्ठी के आरम्भ पर एक दूसरे को बधाई देते हुए अगले महीने मुलाकात की कामना किया।
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