ओबरा (सोनभद्र), 12 जून 2026 परम पूज्य श्रद्धेय स्वामी रामदेव जी महाराज एवं आयुर्वेद शिरोमणि श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के पावन निर्देशन में सोनभद्र पतंजलि के सभी संगठनों के तत्वावधान में ओबरा के चिल्ड्रेन पार्क में 25 दिवसीय सहयोग शिक्षक प्रशिक्षण शिविर अत्यंत सफलतापूर्वक गतिमान है। 20 मई से शुरू हुआ यह शिविर आगामी 15 जून तक संचालित रहेगा। शिविर के 23वें दिन आज योग साधकों और भावी योग शिक्षकों ने हठयोग, राजयोग और स्वर विज्ञान के गूढ़ रहस्यों को समझा। सुबह की वेला में योग शिविर का औपचारिक शुभारंभ मुख्य अतिथि ओबरा परियोजना के सेवानिवृत्त अधिकारी एस. एन. गुप्ता तथा ओबरा नगर प्रभारी नरेंद्र सिंह के कर-कमलों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। शिविर की शुरुआत सामूहिक ओम ध्वनि और गायत्री मंत्र के पावन जप के साथ हुई, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया। मुख्य योग प्रशिक्षक वीरेंद्र योगी जी ने महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित अष्टांग योग और हठयोग के आसनों का गहन अभ्यास कराया। हठयोग प्रदीपिका के श्लोक का संदर्भ देते हुए उन्होंने समझाया हठं विना राजयोगो राजयोगं बिना हठः। न सिध्यति ततो युग्मनिष्पत्यर्थं समभ्यसेत्।। अर्थ हठयोग के बिना राजयोग सिद्ध नहीं होता और राजयोग के बिना हठयोग अपूर्ण है। इसलिए साधक को दोनों का समन्वय पूर्वक निरंतर अभ्यास करना चाहिए। वीरेंद्र योगी जी ने नाड़ी (स्वर) विज्ञान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारे शरीर में (ह) कार सूर्य नाड़ी (पिंगला) का और (ठ)कार चंद्र नाड़ी (इड़ा) का प्रतीक है। जब ये दोनों शक्तियां संतुलित होती हैं, तो तीसरी शक्ति सुषुम्णा का जागरण होता है, जिसे हठयोग में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम के रूप में जाना जाता है। उन्होंने बताया कि हमारे भीतर दो प्रकार की शक्तियां हैं—अग्नि शक्ति (बल, पराक्रम, शौर्य) और सोम शक्ति (श्रद्धा, शांति, धैर्य, प्रेम)। इन दोनों के संयोग से एक दैवीय शक्ति को निष्पन्न करना ही योग का मुख्य कार्य है। हठयोग के आदि प्रणेता भगवान शिव हैं, और इसी परंपरा को गुरु गोरखनाथ, मत्स्येंद्रनाथ और स्वात्माराम जैसे संतों ने जीवित रखा है। प्रशिक्षण सत्र के दौरान साधकों को विभिन्न शारीरिक व्याधियों से मुक्ति के लिए विशेष आसनों का अभ्यास कराया गया। कमर दर्द के लिए: मकरासन, शलभासन, भुजंगासन, नौकासन, धनुरासन और मर्कटासन।
मधुमेह (शुगर) के लिए मंडूकासन, कूर्मासन, शशकासन, गोमुखासन और वक्रासन।
ब्लड प्रेशर (बीपी) के लिए अनुलोम-विलोम प्राणायाम। पेट से संबंधित बीमारियों के लिए कपालभाति प्राणायाम। योग से मिल रहा है नया जीवन मुख्य अतिथि ओबरा परियोजना के सेवानिवृत्त अधिकारी एस. एन. गुप्ता ने अपने उद्बोधन में पतंजलि परिवार और योग प्रशिक्षक वीरेंद्र योगी जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ओबरा में नियमित योग करने से स्थानीय लोगों को अभूतपूर्व स्वास्थ्य लाभ मिल रहा है। उन्होंने स्वामी रामदेव जी महाराज के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए योग शिक्षकों द्वारा जगह-जगह योग कक्षाएं संचालित करने की इस मुहिम को अनुकरणीय बताया। कार्यक्रम का सफल संचालन जिला कोषाध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने किया। शिविर में पतंजलि परिवार के प्रमुख सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें इंजीनियर इंद्रजीत सिंह, नरेंद्र सिंह, घनश्याम सिंह, राजाराम सिंह, लालजी देवेश सिंह (बबलू), राजकुमार मास्टर, प्रमोद कुमार, राकेश सिंह, राजेश यादव, मनोज हौसला तिवारी शामिल थे। महिला विंग से गीता यादव, ममता, मंजू देवी, किरन, प्रियंका, उर्मिला, रेनू, पार्वती, खुशी के साथ योग शिक्षिका मीनाक्षी मौर्य और ऋचा वर्मा ने भी सक्रिय योगदान देकर शिविर को समृद्ध बनाया। शिविर का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि योग के इस प्रकाश को जन-जन तक पहुँचाया जाएगा।
पतंजलि योग पीठ के तत्वावधान में ओबरा में 25 दिवसीय सहयोग शिक्षक प्रशिक्षण शिविर का भव्य आयोजन
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