अनपरा (सोनभद्र)। अनपरा तापीय परियोजना का आवासीय परिसर इन दिनों नियमों को ताक पर रखकर कराए जा रहे अवैध निर्माण और प्रशासनिक सांठगांठ का अखाड़ा बन चुका है। शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में संचालित एक डेयरी की दुकान के पीछे चल रहा अवैध पक्का निर्माण इस समय क्षेत्र में भारी चर्चा और आक्रोश का विषय है। सबसे गंभीर बात यह है कि पूर्व में जिस कार्य को खुद परियोजना प्रबंधन ने रुकवा दिया था, वह अब स्थानीय सिविल विभाग की नाक के नीचे दोबारा धड़ल्ले से शुरू हो गया है। अधिकारियों की इस रहस्यमयी खामोशी ने सिविल प्रबंधन की भूमिका पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।जागरूक कर्मियों और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस डेयरी संचालक द्वारा पहले भी परिसर की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा और निर्माण करने की कोशिश की गई थी। उस दौरान मामला तूल पकड़ने पर उच्च प्रबंधन ने दखल देकर काम रुकवा दिया था। लेकिन महज़ कुछ ही दिनों के भीतर अचानक आज फिर से निर्माण कार्य पूरी रफ्तार से शुरू कर दिया गया। कॉलोनी के निवासियों में यह सुगबुगाहट तेज है कि आखिर किसके रसूख या आशीर्वाद के दम पर परियोजना प्रबंधक के पुराने आदेशों को दरकिनार किया जा रहा है? क्या उच्चाधिकारी सचमुच इस खेल से अनजान हैं, या फिर जानबूझकर धृतराष्ट्र बने बैठे हैं। इस पूरे मामले की तह में जाने पर एक बड़ा प्रशासनिक घालमेल सामने आया है। बताया जा रहा है कि परियोजना क्षेत्र में रोजगार और अस्थाई व्यवस्था के नाम पर कई दुकानें ठेले (वेंडर श्रेणी) के तहत आवंटित की गई थीं। नियमों के मुताबिक यहाँ कोई स्थाई ढांचा खड़ा नहीं किया जा सकता था।
लेकिन रसूखदारों ने नियमों को मरोड़कर एक ठेले की आड़ में पूरी डेयरी खड़ी कर दी। इतना ही नहीं, वर्तमान में डेयरी के ठीक पीछे भारी मात्रा में बालू, गिट्टी और सीमेंट जैसी भवन निर्माण सामग्री डंप की गई है, जो इस बात का सीधा प्रमाण है कि यहाँ व्यापक स्तर पर पक्का निर्माण कर सरकारी संपत्ति को हमेशा के लिए दबाने की तैयारी है। इस मनमानी के खिलाफ क्षेत्र के कद्दावर विद्युत कर्मी नेता प्रशांत उपाध्याय और सुजीत सोनी ने मोर्चा खोल दिया है। सिविल प्रबंधन को आड़े हाथों लेते हुए श्रमिक नेताओं ने कहा आवासीय परिसर के भीतर इस तरह की अराजकता और अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सुरक्षा घेरे और सिविल विभाग की मौजूदगी में इतनी निर्माण सामग्री बिना अधिकारियों की शह के अंदर कैसे आ सकती है? यदि सिविल प्रबंधन तत्काल इस मलबे को ज़ब्त कर निर्माण नहीं रुकवाता, तो यह शीशे की तरह साफ हो जाएगा कि पर्दे के पीछे मोटी साठगांठ की गई है। विद्युत कर्मी नेताओं ने स्थानीय प्रशासन से पुरजोर अपील की है कि अनपरा जैसी प्रतिष्ठित तापीय परियोजना की आवासीय कॉलोनी को भ्रष्टाचार और अवैध कब्जाधारियों का प्रमुख सुरक्षित ठिकाना न बनने दिया जाए। उन्होंने सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि स्थानीय सिविल विंग ने तत्काल इस अवैध निर्माण पर बुलडोजर नहीं चलाया, तो पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट साक्ष्यों, फोटोग्राफ्स और वीडियो के साथ ऊर्जा प्रबंधन, लखनऊ (मुख्यालय) को भेजी जाएगी, जिससे जवाबदेह अधिकारियों की कुर्सी पर आंच आना तय है। अब पूरी कॉलोनी की नजरें परियोजना के उच्च प्रबंधन और सिविल विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं कि वे इस रसूखदार अवैध कब्जाधारी पर हंटर चलाते हैं या फिर भ्रष्टाचार की इस बहती गंगा में हाथ धोते रहते हैं।
महाघोटाला या मिलीभगत? अनपरा आवासीय परिसर में ठेले के आवंटन पर तान दी बड़ी डेयरी, फिर शुरू हुआ अवैध पक्का निर्माण।
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