सोनभद्र। जिला संवाददाता रीना राय।प्राकृतिक संपदा और विशाल भौगोलिक क्षेत्रफल के लिए पहचाना जाने वाला सोनभद्र जिले का सबसे बड़ा विकास खंड (ब्लॉक) चोपन, आज एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मुद्दे को लेकर चर्चा में है। लगभग 4.12 लाख से अधिक की आबादी वाले इस प्रमुख ब्लॉक में अंतिम संस्कार जैसी बुनियादी और पवित्र व्यवस्था भी प्रशासनिक व राजनीतिक उपेक्षा का शिकार बनी हुई है। यहाँ चोपन में सोन नदी के तट पर स्थित श्मशान घाट पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है, जिससे स्थानीय जनमानस में गहरा आक्रोश व्याप्त है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस श्मशान घाट पर रोजाना औसतन दो से चार शवों का दाह-संस्कार किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद यहाँ व्यवस्था के नाम पर शून्य है। अंतिम संस्कार के लिए आने वाले शवों और उनके साथ आने वाले परिजनों के लिए यहाँ न तो कोई शेड (छत) है और न ही सिर छुपाने की कोई मुकम्मल जगह। तपती धूप हो या मूसलाधार बारिश, लोगों को खुले आसमान के नीचे ही घंटों खड़े रहने को मजबूर होना पड़ता है। दुर्दशा का आलम यहीं खत्म नहीं होता घाट पर न तो लाइट (बिजली) की कोई व्यवस्था है, न पीने के स्वच्छ पानी का कोई साधन है और न ही शौचालय की कोई सुविधा। यहाँ तक कि आकस्मिक स्थिति में शवों को गरिमापूर्ण तरीके से लाने-ले जाने के लिए आवश्यक शव वाहन (एम्बुलेंस) की सुविधा भी नदारद है। श्मशान घाट पर मौजूद स्थानीय लोगों ने बेहद भावुक और आक्रोशित लहजे में कहाक्षजिस जगह पर हर इंसान को एक न एक दिन अपना आखिरी सफर तय करके आना है, सरकार और प्रशासन ने उस पवित्र और अंतिम स्थल को भी इस कदर बदहाल छोड़ दिया है। यहाँ जीवित रहते तो परेशानियाँ हैं ही, मरने के बाद भी चैन नसीब नहीं है।इस पूरे मामले में सबसे बड़ा विरोधाभास और स्थानीय लोगों की नाराजगी की मुख्य वजह यहाँ का राजनीतिक नेतृत्व है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण राज्य मंत्री और स्थानीय विधायक संजीव कुमार गौड़ का गृह क्षेत्र चोपन से महज 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित डाला में है। इतना ही नहीं, उनकी धर्मपत्नी खुद इस विशाल चोपन ब्लॉक की ब्लॉक प्रमुख (चेयरपर्सन) हैं। सत्ता के इतने शीर्ष पर सीधी पहुँच होने और ब्लॉक से लेकर मंत्रालय तक का प्रतिनिधित्व इसी क्षेत्र के पास होने के बावजूद, चोपन नगर और ग्रामीण इलाके के इस मुख्य श्मशान घाट की यह दुर्दशा स्थानीय नेतृत्व की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जनता का सीधा और तीखा आरोप है कि जब माननीय और ब्लॉक प्रमुख के अपने ही घर के पास यह हाल है, तो अंदरूनी ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की उम्मीद कैसे की जा सकती है। श्मशान घाट पर बुनियादी सुविधाएं न होने से आक्रोशित स्थानीय नागरिकों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और चहुंमुखी विकास के नाम पर वोट लेने के बाद अब जनप्रतिनिधि आम जनता की इन बुनियादी और व्यावहारिक तकलीफों को पूरी तरह भूल चुके हैं। लोगों में इस बात को लेकर गहरा रोष है कि इस बेहद संवेदनशील और जरूरी जन-समस्या की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। क्षेत्रीय जनता और प्रबुद्ध वर्ग ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि सोन नदी तट स्थित इस श्मशान घाट का तुरंत जीर्णोद्धार किया जाए। दाह-संस्कार स्थल पर तत्काल पक्के शेड (छत) का निर्माण कराया जाए। परिजनों के बैठने के लिए प्रतीक्षालय, पीने के पानी, बिजली (लाइटिंग) और शौचालय की व्यवस्था युद्धस्तर पर की जाए। क्षेत्र के लिए एक समर्पित शव वाहन की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि जल्द ही इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो क्षेत्र की जनता इस उपेक्षा के खिलाफ मुखर होकर आंदोलन करने को विवश होगी।
वीआईपी क्षेत्र में अंतिम सफर भी बदहाल चोपन में सोन नदी तट स्थित श्मशान घाट दुर्दशा का शिकार, अपनों के बीच ही घिरे माननीय
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