ओबरा/सोनभद्र ( संवाददाता रीना राय)। जनपद सोनभद्र के ओबरा में करोड़ों रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किए गए नवनिर्मित तहसील परिसर की पहली ही बारिश में प्रशासनिक दावों और व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी। परिसर से बारिश का पानी निकलने का समुचित इंतजाम न होने के कारण पूरी तहसील जलमग्न होकर तालाब में तब्दील हो गई। चारों ओर लबालब भरे पानी के बीच वादकारियों, अधिवक्ताओं और विभागीय कर्मचारियों को घुटने भर पानी से होकर आवागमन करना पड़ा, जिससे दिनभर न्यायिक कार्य बुरी तरह प्रभावित रहा। नवनिर्मित तहसील परिसर में हुए इस भीषण जलभराव ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और ड्रेनेज सिस्टम की प्लानिंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों व अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि पहली ही सामान्य बारिश में परिसर का यह हाल है, तो पूरे मानसून सत्र में हालात और भी नारकीय व गंभीर हो सकते हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जल निकासी जैसी मूलभूत आवश्यकता की अनदेखी करना कार्यदायी संस्था की घोर लापरवाही को उजागर करता है।
अधिवक्ता संघर्ष समिति के संयोजक उमेश चंद्र शुक्ला ने तहसील एवं जिला प्रशासन से मामले का तत्काल संज्ञान लेने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने कहा कि नवनिर्मित परिसर में स्थायी और प्रभावी जल निकासी की व्यवस्था अविलंब कराई जाए ताकि दूर-दराज से आने वाले फरियादियों और वकीलों को सहूलियत हो सके। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा यदि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शीघ्र ही इस समस्या का ठोस व स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो ओबरा के अधिवक्ता उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या निर्माण कार्य के दौरान जल निकासी जैसी बुनियादी जरूरत को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया, या फिर जिम्मेदार एजेंसियों ने गुणवत्ता मानकों से समझौता किया। पहली ही बारिश में सामने आई यह भयावह तस्वीर संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही है। फिलहाल क्षेत्रवासियों और वकीलों की निगाहें जिला प्रशासन द्वारा की जाने वाली दंडात्मक व सुधारात्मक कार्रवाई पर टिकी हैं।
सोनभद्र करोड़ों की लागत से बने ओबरा तहसील परिसर में जल निकासी व्यवस्था फेल पहली ही बारिश में डूबा परिसर, अधिवक्ता आक्रोशित
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