गाजीपुर। करीमुद्दीनपुर (राजापुर)किसान दिवस के अवसर पर मंगई नदी से जुड़ी दशकों पुरानी और हजारों किसानों के जीवन को प्रभावित करने वाली गंभीर समस्या एक बार फिर प्रशासन के समक्ष उठाई गई। सामाजिक कार्यकर्ता एवं किसान हितैषी मृत्युंजय राय (राजापुर) ने मुख्य विकास अधिकारी आलोक प्रसाद को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर मंगई नदी में शारदा सहायक नहर का पानी छोड़े जाने से उत्पन्न हो रही जलजमाव की समस्या, किसानों को हो रहे आर्थिक नुकसान तथा अवैध मत्स्य गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की।।
ज्ञापन में बताया गया कि पिछले लगभग 35 वर्षों से मंगई नदी में शारदा सहायक नहर का पानी छोड़े जाने के कारण गाजीपुर जनपद की मोहम्मदाबाद विधानसभा (378), जहूराबाद विधानसभा (377) तथा बलिया जनपद की फेफना विधानसभा (360) के अंतर्गत आने वाले करईल क्षेत्र की हजारों हेक्टेयर उपजाऊ कृषि भूमि रबी फसलों की बुवाई के समय तक जलमग्न रहती है। यह स्थिति किसानों के लिए किसी मानव निर्मित आपदा से कम नहीं है।।
मृत्युंजय राय ने कहा कि देश की बड़ी-बड़ी नदियां बरसात के बाद अपने प्राकृतिक प्रवाह क्षेत्र में लौट जाती हैं, लेकिन मंगई नदी में कृत्रिम रूप से छोड़ा जाने वाला पानी अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर तक खेतों में जलभराव की स्थिति बनाए रखता है। परिणामस्वरूप किसान समय से गेहूं, चना, मसूर, सरसों एवं अन्य रबी फसलों की बुवाई नहीं कर पाते। विलंब से की गई बुवाई के कारण फसलों को पर्याप्त विकास अवधि नहीं मिलती और बदलते मौसम तथा बढ़ते तापमान के चलते उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होता है।।
उन्होंने बताया कि देर से बोई गई फसलों में फूल आने के समय अत्यधिक तापमान पड़ने से फूल झड़ जाते हैं, फलियों में दाना नहीं बनता तथा किसानों की लागत बार-बार डूब जाती है। इससे क्षेत्र के किसान आर्थिक संकट में फंसते जा रहे हैं। लगातार नुकसान झेलने के कारण किसान कर्ज के बोझ तले दब रहे हैं, युवाओं का पलायन बढ़ रहा है और खेती से मोहभंग की स्थिति पैदा हो रही है।।
ज्ञापन में इस बात पर भी चिंता व्यक्त की गई कि किसानों द्वारा वर्षों से समस्या उठाए जाने के बावजूद आज तक इसका कोई स्थायी एवं वैज्ञानिक समाधान नहीं किया गया। कई बार प्रशासन द्वारा राहत एवं बचाव कार्यों का दावा किया जाता है, लेकिन वास्तविक रूप से प्रभावित किसानों को न तो पर्याप्त मुआवजा मिल पाता है और न ही फसल क्षति का समुचित आकलन किया जाता है। यहां तक कि विलंबित बुवाई एवं फसल नुकसान के बावजूद अनेक किसान सरकारी सहायता से वंचित रह जाते हैं।।
मृत्युंजय राय ने प्रशासन का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया कि बरसात के दौरान मंगई नदी में बढ़े जलस्तर का फायदा उठाकर कुछ मत्स्य माफिया नदी के प्राकृतिक बहाव को अवरुद्ध कर अवैध रूप से मछली पकड़ने का कार्य करते हैं। नदी में अवैध बांधन और जाल लगाने से जलनिकासी प्रभावित होती है, जिससे खेतों में जलभराव की समस्या और गंभीर हो जाती है। उन्होंने ऐसे तत्वों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध समय रहते धारा 107/116 के तहत पाबंद किए जाने तथा नियमों के उल्लंघन पर कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।।
ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से मांग की गई कि मंगई नदी एवं उससे प्रभावित क्षेत्रों का व्यापक सर्वेक्षण कराया जाए, जलजमाव के वास्तविक कारणों का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए, किसानों को हुए नुकसान का आकलन कर उचित क्षतिपूर्ति दिलाई जाए तथा नदी की जलनिकासी व्यवस्था को सुदृढ़ कर समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए।।
किसान दिवस पर उठाई गई इस मांग को क्षेत्र के किसानों की वर्षों पुरानी पीड़ा और संघर्ष की आवाज बताते हुए मृत्युंजय राय ने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में कृषि उत्पादन, किसानों की आर्थिक स्थिति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका और गंभीर प्रभाव पड़ेगा।।
मुख्य विकास अधिकारी आलोक प्रसाद ने ज्ञापन प्राप्त कर संबंधित विभागों से मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया।।

