ओबरा, सोनभद्र 04 जून, 2026 पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के निर्देशन में सोनभद्र जिले के समस्त योग संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 25 दिवसीय योग शिक्षक प्रशिक्षण शिविर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। ओबरा के चिल्ड्रेन पार्क स्थित योग भवन में चल रहे इस शिविर के 14वें दिन योग साधकों का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रातःकालीन सत्र का शुभारंभ मुख्य अतिथि सिंचाई विभाग में कार्यरत कार्यालय अधीक्षक लालजी एवं सहायक प्रधानाचार्य देवेश कुमार सिंह द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम का कुशल संचालन ओबरा प्रभारी नरेंद्र सिंह द्वारा किया गया। शिविर में मुख्य योग प्रशिक्षक वीरेंद्र योगी ने साधकों को योगिक जॉगिंग, सूर्य नमस्कार और विभिन्न कठिन आसनों का सघन अभ्यास कराया। महर्षि पतंजलि प्रणीत अष्टांग योग के चौथे अंग ‘प्राणायाम’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा एक समय था जब प्राणायाम कठिन माना जाता था और इसे करने के लिए बड़ा साहस जुटाना पड़ता था। परंतु परम पूज्य योग ऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज ने अपनी सरल विधाओं से इसे न केवल सर्वसुलभ बना दिया है, बल्कि आज हर व्यक्ति इसे अपनी स्वस्थ जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा मानने लगा है। प्रत्येक घर में प्रतिदिन योग होना चाहिए ताकि पूरे परिवार का तन, मन और विचार शुद्ध व स्वस्थ रहे। प्रशिक्षण के दौरान वीरेंद्र योगी जी ने योग के गूढ़ वैज्ञानिक पक्षों को साझा करते हुए शरीर के भीतर संचालित होने वाली प्राण वायु के बारे में विस्तार से समझाया।शरीर को संचालित करने वाले पांच मुख्य प्राण हैं— प्राण, अपान, उदान, समान और व्यान। मुख्य प्राणों के अतिरिक्त शरीर में पांच उपप्राण भी सक्रिय रहते हैं— देवदत्त, नाग, कृकल, कूर्म और धनंजय। मानव शरीर में छींकना, पलक झपकाना, जंभाई लेना, खुजलाना और हिचकी जैसी स्वाभाविक क्रियाएं इन्हीं उपप्राणों के माध्यम से संचालित होती हैं। उन्होंने आगे बताया कि अगले सत्रों में मानव शरीर के ‘पंच कोश’ के विषय में विस्तार से वर्णन किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि योग और प्राणायाम आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, चाहे कोई अमीर हो, गरीब हो, पुजारी हो, पत्रकार हो या खिलाड़ी—यह सभी के लिए अनिवार्य है। इस 25 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का मुख्य उद्देश्य जिले में नए और ऊर्जावान योग शिक्षकों को तैयार करना है। ये नवनिर्मित शिक्षक भविष्य में जगह-जगह योग कक्षाएं संचालित करेंगे। स्वामी रामदेव जी और श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज का यही संकल्प है कि भारत का प्रत्येक नागरिक सुबह उठकर योग साधना से जुड़े, ताकि समाज को बीमारियों और मानसिक तनाव से पूर्णतः मुक्त किया जा सके। योग मात्र एक व्यायाम नहीं, बल्कि एक औषधीय पद्धति और आत्म-अनुशासन है। पतंजलि योगपीठ हरिद्वार से सोनभद्र जिले के कोषाध्यक्ष जितेंद्र जी को एक विशेष प्रशंसा पत्र प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि पर वरिष्ठ योग शिक्षक राजेश शर्मा और लालजी ने उन्हें भेंट कर सम्मानित किया और बधाई दी। शिविर के समानांतर जिला प्रभारी वीरेंद्र योगी जी के मार्गदर्शन में निःशुल्क चिकित्सा सेवा भी दी जा रही है। आज बड़ी संख्या में साधकों को आंख और कान की दवाएं निःशुल्क वितरित की गईं, जिससे लोगों को काफी राहत मिली। ओबरा में योग सीखने और शिक्षक बनने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पतंजलि परिवार द्वारा चिल्ड्रेन पार्क स्थित योग भवन में सभी सेवाएं पूर्णतः निःशुल्क दी जा रही हैं। आयोजकों ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे सुबह अपने साथ केवल एक दरी लेकर आएं और इस स्वास्थ्य क्रांति का हिस्सा बनें।
ओबरा में योग साधकों का उमड़ा जनसैलाब 25 दिवसीय योग शिक्षक प्रशिक्षण शिविर के 14वें दिन प्राणायाम और पंचप्राण पर विशेष चर्चा
Related Posts
Add A Comment

