हापुड़ (मनीष कुमार) सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों को समय पर बेहतर इलाज मुहैया कराने और असमय होने वाली मौतों को रोकने के लिए सरकार ने एक बेहद संवेदनशील कदम उठाया है। इसी क्रम में मंगलवार दोपहर पुलिस अधीक्षक कार्यालय के मीटिंग रूम में पुलिस, स्वास्थ्य और एनआईसी विभाग की एक संयुक्त बैठक आयोजित की गई। यह बैठक ‘पीएम राहत कैशलेस ट्रीटमेंट’ योजना को लेकर एक सेमिनार के रूप में आयोजित हुई बैठक में एनआईसी के जिला आईआरएडी (iRAD) प्रभारी निशांत राजपूत ने प्रशिक्षण देते हुए बताया कि इस योजना के तहत सड़क हादसे में घायल किसी भी व्यक्ति को जब अस्पताल ले जाया जाएगा, तो अस्पताल का स्टाफ TMS पोर्टल पर उसकी ‘विक्टिम आईडी’ (Victim ID) जेनरेट करेगा।
अस्पताल द्वारा आईडी जेनरेट किए जाने के बाद पुलिस को 24 से 48 घंटे के भीतर इसका डिजिटल सत्यापन (Verification) करना होगा। पुलिस वेरिफिकेशन होते ही घायल व्यक्ति का अस्पताल में 7 दिनों तक बिल्कुल मुफ्त इलाज शुरू हो जाएगा इस योजना के अंतर्गत प्रति व्यक्ति 1 रुपये से लेकर 1.5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज का प्रावधान किया गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य दुर्घटना के बाद शुरुआती समय में इलाज न मिल पाने के कारण होने वाली मौतों को रोकना है। बैठक में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी व आईआरएडी के हेल्थ नोडल अधिकारी डॉ. सुनील गुप्ता के साथ कई निजी (प्राइवेट) अस्पतालों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया और योजना को सफल बनाने की प्रतिबद्धता जताईबैठक में मौजूद सीओ ट्रैफिक राहुल यादव ने बताया कि घायलों को समय से अस्पताल पहुंचाने के लिए सरकार की ‘राहगीर योजना’ भी बेहद कारगर है। इसके तहत यदि कोई राहगीर किसी सड़क दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को ‘गोल्डन ऑवर’ (हादसे के ठीक बाद का पहला एक घंटा) में अस्पताल पहुंचाता है, तो उसे सरकार की तरफ से 25,000 रुपये तक की प्रोत्साहन धनराशि देकर सम्मानित किया जाएगा।
यह पूरा प्रशिक्षण और सेमिनार जिला सूचना एवं विज्ञान अधिकारी प्रशांत सिरोही के कुशल नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें तीनों विभागों के समन्वय पर विशेष जोर दिया गया ताकि धरातल पर किसी भी मरीज को परेशानी न हो
सड़क हादसों में घायलों को मिलेगा 1.5 लाख तक का मुफ्त इलाज एसपी ऑफिस में हुई महत्वपूर्ण बैठक
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