ओबरा (सोनभद्र)। पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के पावन निर्देशन एवं सोनभद्र पतंजलि के समस्त सहयोगी संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 25 दिवसीय ‘सहयोग शिक्षक प्रशिक्षण शिविर’ अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रहा है। इसी क्रम में रविवार को शिविर के 18वें दिन योग और आध्यात्मिकता का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ मुख्य योग शिक्षक राजकुमार, मनोज कुमार और राम-लखन ठाकुर द्वारा संयुक्त रूप से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस शिविर में ओबरा और आसपास के क्षेत्रों से आए साधक योग की बारीकियों को सीखकर समाज को स्वस्थ बनाने का संकल्प ले रहे हैं। शिविर के 18वें दिन सोनभद्र जिले के पतंजलि परिवार के शीर्ष नेतृत्व का आगमन हुआ, जिनका आयोजन समिति द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया।पतंजलि योग समिति सोनभद्र के जिला प्रभारी रवि प्रकाश त्रिपाठी, भारत स्वाभिमान सोनभद्र के जिला महामंत्री सुनील कुमार चौबे, पतंजलि के तहसील प्रभारी दिलीप सिंह, और किसान संगठन के जिला संगठन मंत्री मोहर देव जी तथा नगर संयोजक दिनेश कुमार श्रीवास्तव जी को अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। योग ऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज द्वारा लिखित दर्शन शास्त्र की प्रतिष्ठित पुस्तकें वरिष्ठ साधक घनश्याम सिंह, राजाराम सिंह, लालजी, देवेश सिंह और आनंद जी द्वारा अतिथियों को सप्रेम भेंट की गईं। महिला समिति की जिला मंत्री पूनम सिंह ने साधक शालिनी छाया जी को दर्शन पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया। इसी प्रकार, योग शिक्षक लालजी ने प्रणोद कुमार सिंह को पुस्तक देकर उनका हौसला बढ़ाया। सत्र के समापन पर जिला प्रभारी रवि प्रकाश त्रिपाठी ने जिला कोषाध्यक्ष जितेन्द्र सिंह को भी अंग वस्त्र पहनाकर सम्मानित किया। रविवार के मुख्य योग सत्र का संचालन भारत स्वाभिमान सोनभद्र के जिला महामंत्री व योग शिक्षक सुनील कुमार चौबे द्वारा किया गया। उन्होंने उपस्थित सभी साधकों को अष्टांग योग के आठ अंगों की महिमा विस्तार से समझाई। उन्होंने प्रयोगात्मक रूप से बताया कि किस प्राणायाम को कितने समय तक करने से शरीर की गाठें , मोटापा, गैस, कब्ज, घुटनों का दर्द, कमर दर्द, एड़ी का दर्द, ब्लड प्रेशर (BP), शुगर, थायराइड, बवासीर, प्रोस्टेट और यूरिक एसिड जैसी गंभीर समस्याओं को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। शिविर के दूसरे सत्र में योगी वीरेंद्र जी ने साधकों को मानव शरीर के सूक्ष्म विज्ञान यानी पंचकोश (पंच शरीर) के बारे में अत्यंत गूढ़ और वैज्ञानिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हमारी आत्मा इन पांच कोशों के साथ संयुक्त है शुद्ध और नियमित आहार-विहार से हमारा यह भौतिक शरीर (अन्नमय कोश) पुष्ट और स्वस्थ रहता है। शरीर और मन को जोड़ने वाला माध्यम प्राण है। इसमें 5 मुख्य प्राण (प्राण, अपान, उदान, समान, व्यान) और 5 उपप्राण (धनंजय, नाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त) शामिल हैं। योग से इसकी कार्यशक्ति बढ़ती है। इसके अंतर्गत हमारा मन, बुद्धि, अहंकार और चित्त आता है, जो हमारी मानसिक शक्ति को नियंत्रित करता है। जब मनुष्य विवेक और ज्ञानपूर्वक आचार-विचार करता है, तो उसका विज्ञानमय कोश जागृत होता है। यह हमारे हृदय प्रदेश में स्थित है। यहाँ पहुंचकर साधक जीव-मुक्त होकर सदा आनंदमय स्थिति में रहता है। योगी वीरेंद्र जी ने आगे जोड़ते हुए कहा कि प्राणायाम का अंतिम परिणाम समाधि है। जब हम श्वास लेते हैं, तो केवल ऑक्सीजन अंदर नहीं जाती, बल्कि एक अखंड दिव्य जीवनी शक्ति हमारे भीतर प्रवेश करती है। गंभीर योग और ज्ञान सत्र के अंत में साधकों ने तनाव दूर करने के लिए सिंहासन और हास्यासन (जोरदार ठहाके) का अभ्यास किया। इसके बाद विश्व कल्याण की प्रार्थना के साथ 18वें दिन के शिविर को विराम दिया गया। इस पूरे सफल कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन ओबरा प्रभारी नरेंद्र सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से योग शिक्षक भाई लालजी, देवेश सिंह, बबलू प्रजापति, राम लखन, राजाराम, घनश्याम सिंह, राकेश कुमार, राजेश, कृष्णा सिंह, मनोज कुमार, आनंद जी, अरुण कुमार, केशव जी उपस्थित रहे। वहीं मातृशक्ति की ओर से महिला मंत्री पूनम सिंह, मंजू देवी, रेनू, उर्मिला, कुसुम और रंजना पांडेय सहित भारी संख्या में साधक व बहनें उपस्थित रहीं।
ओबरा पतंजलि के 25 दिवसीय सहयोग शिक्षक प्रशिक्षण शिविर में गूंजा अष्टांग योग का महत्व, साधकों ने सीखी पंचकोश की साधना
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