सोनभद्र। लखनऊ में अपनी जायज मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रहे वकीलों पर पुलिस द्वारा किए गए बर्बरता पूर्वक लाठीचार्ज का मामला अब गरमाता जा रहा है। इस हिंसक घटना के विरोध में सोमवार को रॉबर्ट्सगंज कचहरी परिसर स्थित डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन (डीबीए), सोनभद्र के सभागार में वकीलों की एक आपात बैठक आयोजित की गई। बैठक में अधिवक्ताओं ने पुलिसिया कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की और दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई। बैठक की अध्यक्षता कर रहे डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष जगजीवन सिंह एडवोकेट ने पुलिस की इस कार्रवाई को लोकतंत्र पर कुठाराघात बताया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा अधिवक्ता हमारी न्याय व्यवस्था की रीढ़ हैं। लखनऊ में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे वकीलों पर जिस प्रकार बर्बरता से लाठियां बरसाई गईं, वह अत्यंत शर्मनाक और निंदनीय है। यह हमला केवल वकीलों पर नहीं, बल्कि हमारे संविधान और न्यायपालिका की गरिमा पर हुआ है। सोनभद्र का प्रत्येक अधिवक्ता इस दमनकारी घटना से स्तब्ध और आक्रोशित है। पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष पीके सिंह एडवोकेट ने भी घटना पर गहरा दुख जताते हुए सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि लखनऊ में वकीलों के ऊपर हुई इस बर्बरता पूर्वक लाठीचार्ज की घटना की तत्काल किसी स्वतंत्र एजेंसी से उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही, जिन पुलिसकर्मियों ने कानून को हाथ में लिया है, उनके विरुद्ध मुकदमा (एफआईआर) दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष संतोष कुमार यादव एडवोकेट ने पुलिस प्रशासन के इस कदम को पूरी तरह अलोकतांत्रिक करार दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस का यह कृत्य सरासर तानाशाहीपूर्ण है। सरकार को इस मामले का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए और लाठीचार्ज का आदेश देने वाले अधिकारियों समेत दोषी पुलिसकर्मियों को फौरन निलंबित करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि इस घटना में घायल हुए सभी अधिवक्ताओं के लिए सरकार समुचित और मुफ्त इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करे। इस महत्वपूर्ण आपात बैठक का संचालन पूर्व महामंत्री प्रदीप कुमार मौर्य एडवोकेट ने किया। इस विरोध सभा में लखनऊ के वकीलों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए भारी संख्या में स्थानीय अधिवक्ता एकत्र हुए।
इस मौके पर मुख्य रूप से अधिवक्ता राजेश कुमार यादव, पवन कुमार सिंह, रियाज खान, विनीत श्रीवास्तव, रामगुल्ली यादव, टीटू कुमार गुप्ता, शाहनवाज आलम खान, कामता प्रसाद यादव, आदर्श देव पांडेय, सुरेश सिंह कुशवाहा, नवीन पांडेय, विनीता, चंद्रकला गिरी, सरस्वती देवी समेत दर्जनों अधिवक्ता मौजूद रहे और सभी ने एक सुर में न्याय की मांग की।
वकीलों पर नहीं, बल्कि संविधान और न्यायपालिका की गरिमा पर हमला है जगजीवन सिंह
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