(गाजीपुर)। चार मुहर्रम के अवसर पर शनिवार की रात सादात नगर स्थित कोर्ट साहब के इमामबाड़े से परंपरागत झूला-ए-मासूम अली असगर बरामद किया गया। इस मौके पर आयोजित मजलिस, मातम और नौहाख्वानी में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए और कर्बला के शहीदों को अश्कों के साथ याद किया।
इससे पूर्व आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना असद (कोपागंज, मऊ) ने कहा कि हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नवासे इमाम हुसैन अमन, सच्चाई, कुर्बानी, सब्र और शुक्र का प्रतीक थे। उन्होंने अपने परिवार के बुजुर्गों, जवानों और यहां तक कि अपने छह माह के दूधमुंहे बेटे हजरत अली असगर की शहादत भी कबूल कर ली, लेकिन अत्याचार और अन्याय के प्रतीक यजीद की बैअत स्वीकार नहीं की।
मौलाना ने मसाएब-ए-कर्बला का मार्मिक बयान किया, जिसे सुनकर मजलिस में मौजूद अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं। पेशख्वानी सफदर इमाम आब्दी और मोहम्मद कैफ ने की।
इसके बाद अंजुमन हुसैनिया कच्चीबाग वाराणसी, सादात, मजुई और बहरियाबाद की अंजुमनों ने देर रात तक नौहाख्वानी और सीनाजनी कर शहीदाने कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया। वातावरण “या अली”, “या हुसैन”, “हक हुसैन”, “या अब्बास” और “हाए सकीना” की सदाओं से गूंजता रहा।
इस अवसर पर सय्यद जाफर आब्दी, अकील अहमद, शहंशाह, मुन्तजिर इमाम, तारिक, फायक हसन, शारिक, हैदर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कैप्शन : सादात नगर में चार मुहर्रम के अवसर पर झूला-ए-मासूम अली असगर के साथ शामिल अकीदतमंद।
चार मुहर्रम पर बरामद हुआ झूला-ए-मासूम अली असगर, मातम व नौहाख्वानी से गूंजा सादात नगर
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